बुधवार, 15 सितंबर 2010

गपशप यहाँ वहा की ...



नागपुर शहर से १६ कि मी दुरी पर कामठी शहर है, ब्रिटिशो द्वारा अपनी सेनाओ के केम्प के रूप में इस शहर को इस्तेमाल किया जाता था । कन्हान नदी के तट पर बसे हुए ब्रिटिश कालीन कामठी फौजी छावनी को अब भारतीय थलसेना की सबसे गौरवशाली रेजिमेंट में से एक "ब्रिगेड ऑफ डी गार्ड्स " उपयोग करती है । यह देश की एकमात्र रेजिमेंट है जिसके वीर फौजियों ने २ परम वीर चक्र प्राप्त किये है , साथ ही नेशनल कैडेट कोर की ऑफिसर'स ट्रेनिंग अकेडमी जो की अपने तरह की एकमात्र है यहाँ पर है। काँटोंनमेंट क्षेत्र होने से पूरा माहौल नियंत्रित और अनुशाषित होता है , इस हरे भरे सुंदर नयनरम्य परिसर की गरिमामय सुन्दरता को यहाँ बस स्वयं घूमकर ही एहसास किया जा सकता है , इसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है ... और जो यहाँ रहते थे और रहते है वो यहाँ की हवाओ में फैली खुशबु को कभी भूल नहीं पाए है और भूल भी नहीं सकते । धीरे धीरे यहाँ अब रहने वालो आम नागरिको की संख्या कम होती गई है और विशाल शानदार माल रोड के किनारे बसे सम्पन्न कोठियो और बंगलो की पूरी एक श्रंखला भी अब वैसी वैभवशाली नहीं रह गई दिखती है । छावनी क्षेत्र के दो छोरो पर स्तिथ है , १ गोरा बाज़ार और २ काली पलटन, जैसे की नाम से ही ज़ाहिर है अंग्रेजो ने अपनी आवश्यक वस्तु और सेवाओ की आपूर्ति हेतु गोरा बाज़ार बनवाया था जो की अब भी है , छोटी छोटी दुकान , लौंड्री कामगार, सफाई कर्मी , सेवादार, बावर्ची और अन्य सेवक लोगो को अंग्रेजो ने यहाँ बसा रखा था , इनके वर्तमान पीढ़ी के कुछ गिने चुने परिवार अब भी यहाँ रहते है। ज्यादातर लोग बदलते समय और विकास के साथ कामठी शहर के दुसरे मुख्य क्षेत्रो में जाकर रहने लगे है और कुछ स्थलांतर कर गए है । काली पलटन को भारतीय सैनिको के निवासी केम्प के रूप में जाना जाता था । अब यहाँ पर सैनिको के रहने के लिए शानदार और अच्छी श्रेणी के रूम्स बन चुके है, इस क्षेत्र के बड़े पोस्ट ऑफिस के पीछे बने मैदान पर क्रिकेट और होकी के शानदार मैच हुआ करते थे, शहर से लगे हुए दो विशाल मैदान जो की सेना के अधिकार क्षेत्र में है वे सामान्यतः उस ८० के काल में टेम्पल ग्राउंड और रब्बानी मैदान के नाम से जाने जाते थे ( अब तक मेरे द्वारा देखे गए किसी भी मैदान में ये सबसे व्यस्त और जानदार मैदान है ) इन मैदानों में उस समयकाल में सुबह और शाम के समय जितने युवा, बच्चे, बूढ़े और विभिन्न आय और आयु वर्ग के लोग एक साथ सैर का , खेलने का, पतंग उड़ाने का , दौड़ लगाने का , कराते और जुडो की प्रक्टिस करते हुए मैंने देखे है वो कही कभी नहीं देखे । कामठी को विदर्भा का ब्राज़ील कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी , फूटबाल के लिए देश के अनेको हुनरमंद खिलाडियों ने यहाँ से अपनी यात्राये शुरू की है , सुप्रसिद्ध और अजेय फूटबाल टीमो में रब्बानी क्लब , यंग इकबाल , न्यू ग्लोब जैसी टीमो से कामठी की शान देखते ही बनती है, बदलते समय में भी आज इन टीमो ने अपनी चमक लगातार बनाये रखी है ।

सभी आम कामठी वासियों का आपसी भाई चारे में बहुत गाढ़ा भरोसा है, अलग अलग धर्मो और जातियों के बीच वाद विवाद दुसरे शहरों की तुलना में नहीं के बराबर ही होते होंगे। इसी का यह उदहारण है की इस छोटे से शहर में अंग्रेजो के ज़माने के दो सुन्दर और विशाल चर्च आज भी ख्रिस्ती भाइयो के सबसे मुख्य केंद्र है , कुछ छोटे चर्च अब और बन गए है, मस्जिदों की पूरी ४० से भी ज्यादा संख्या मुसलमान भाइयो के भरोसे और स्थ्यित्व को दर्शाती है, जिसमे बड़ी मस्जिद १३० साल और कोलसाताल और शिया हैदरिया जामिया मस्जिद अब १०० साल से ज्यादा की हो चुकी है, कन्हान नदी के दूसरी तरफ बनी हुई " अम्मा की दरगाह " को सर्व धर्मं समभाव की निशानी है , जहा हमेशा लोगो का तांता लगा रहता है, बौध भाइयो के लिए देश की सुंदरतम निर्माणों में से एक " ड्रेगन टेम्पल " स्थानीय और बाहर के लोगो का तांता लगा रहता है , यहाँ आये सैलानियों की यह बहुत बड़ी दर्शनीय स्थली है । और अनेक बुध्द विहार आपको यहाँ मिल जायेंगे। और सबसे मुख्य और पुराने मंदिरों में " श्रीराम मंदिर " , कन्हान रोड पर स्तिथ " श्री साईनाथ मंदिर " कन्हान नदी के दूसरी तरफ (गोरा बाज़ार के पास ) पुरातन शिव मंदिर, सुप्रसिद्ध महादेव घाट पर " श्री हनुमान , श्री गणेश , शिव मंदिर , सभी हिन्दुओ की अखंड श्रद्दा की जागृत स्थली है । महादेव घाट के पास बने अन्ग्रेज्कालीन " कामठी क्लब " आज भी अपनी पुरानी आन और शान के साथ इतराता हुआ सा दीखता है । इसी क्षेत्र के पास एक विश्व स्तरीय खुबसूरत गोल्फ क्लब भी है।
छावनी क्षेत्र में पुराने और नामचीन स्कूलों की भरमार है , इनमे मध्य भारत के सबसे पुराने "मदर कॉन्वेंट " सेंट जोसेफ'स कॉन्वेंट का नाम सबसे पहले लिया जाता है, सेंट जोसेफ'स कॉन्वेंट का इतिहास बहुत ही चमत्कारिक और गौरवशाली है , इसके बारे में अलग से एक विवरण दूंगा, लडकियों के लिए रामकृष्ण मिसन द्वारा संचालित " स्कूल ऑफ होम साईंस " , केंद्रीय विद्यालय, छावनी हिंदी इंग्लिश स्कूल, आर्मी स्कूल, जैसे विशाल और प्रतिष्टित स्कूल की वजह से यह क्षेत्र शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया है, केंद्रीय विद्यालय के पास ही एक छोटा सा " छावनी अस्पताल " है , यही पर ४ फरवरी, १९७३ की सुबह मैंने जन्म लिया और इस खुबसूरत सी दुनिया को अपनी नज़रो से देखा, और कुछ चंद बहुत ही अच्छी किस्मत वालो की सूचि में शुमार हो गया जिनको यहाँ रहकर जीवन जीने का मौका मिला , सेंट जोसेफ'स की भाग्य बनाने वाली कक्षाओं में शिक्षा का अवसर मिला,





















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